Saturday, 11 March 2017

शादी, हिस्सा-5, मियां बीवी के एक दूसरे पर हुक़ूक़


*हिस्सा-5*

                             *शादी*


        *मियां बीवी के एक दूसरे पर हुक़ूक़*

*बीवी के हुक़ूक़*

* अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त क़ुरान मुक़द्दस में इरशाद फरमाता है कि

1. अपनी बीविओं से अच्छा बर्ताव करो

📕 पारा 4,सूरह निसा,आयत 19

2. और औरतों का हक़ शरह के मुआफ़िक जो है उसे अदा करो

📕 पारा 2,सूरह बक़र,228

* और हदीसे पाक में रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि

3. ईमान में सबसे ज़्यादा कामिल वो है जिसके अख़लाक़ अच्छे हों और अपनी बीवी के साथ नरमी बरते

📕 तिर्मिज़ी,जिल्द 1,सफह 138
📕 मिश्क़ात,जिल्द 2,सफह 282

4. औरत टेढ़ी पसली से पैदा की गई है लिहाज़ा उसको एकदम सीधा करने की कोशिश करोगे तो तोड़ दोगे तो ऐसे ही टेढ़ी रखकर उससे फायदा उठाओ

📕 बुखारी,जिल्द 2,सफह 779

5. औरत के ये 4 हक़ हैं जिसे शौहर को अदा करना है

! जिस हैसियत का खाना खुद खाये वैसा ही अपनी बीवी को खिलाए
! जिस हैसियत का कपड़ा खुद पहने वैसा ही उसे भी पहनाए
! रहने का मकान हस्बे हैसियत हो
! और उसकी ज़रुरत (हमबिस्तरी) पूरी करता रहे

📕 अबु दाऊद,सफह 291
📕 फतावा रज़वियह,जिल्द 5,सफह 907

*शौहर के हुक़ूक़*

6. मर्द अफसर यानि हाकिम हैं औरतों पर

📕 पारा 5,सूरह निसा,आयत 34

* एक शौहर का अपनी बीवी पर इतना बड़ा हक़ है कि उसको समझने के लिए ये एक ही हदीसे पाक काफी है हुज़ूरे अक़्दस सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि

7. अगर ख़ुदा के सिवा किसी को सजदा जायज़ होता तो मैं औरतों को हुक्म देता की अपने शौहरों को सजदा करें और ख़ुदा की कसम कोई औरत ख़ुदा का हक़ अदा नहीं कर सकती जब तक कि अपने शौहर का हक़ न अदा कर ले

📕 इब्ने माजा,सफह 133

8. जिस औरत को मौत ऐसी हालत में आये की उसका शौहर उससे राज़ी हो तो वो जन्नती है

📕 तिर्मिज़ी,जिल्द 1,सफह 138

9. कोई औरत बगैर शौहर की मर्ज़ी के हरगिज़ नफ्ल रोज़ा न रखे अगर रखेगी तो गुनाहगार होगी और हरगिज़ उसकी मर्ज़ी के बिना घर ना छोड़े वरना जब तक कि पलट कर ना आएगी इन्सो जिन्न के सिवा अल्लाह की तमाम मख़लूक़ उसपर लानत करेगी

📕 फतावा रज़वियह,जिल्द 9,सफह 197

10. बेहतरीन औरत वो है जो हमेशा अपने शौहर को खुश रखे और शौहर जो हुक्म दे उसे पूरा करे

📕 निसाई,जिल्द 2,सफह 60

11. औरत का अपने शौहर की नाफरमानी करना गुनाहे कबीरा है बग़ैर शौहर को राज़ी करे व बग़ैर तौबा के हरगिज़ माफ़ न होगी

📕 किताबुल कबायेर,सफह 291

*कहते हैं कि अक़्लमंद को इशारा ही काफी होता है इसी को सामने रखकर ये चन्द जुमले क़ुरानों हदीस से बयान कर दिए,मौला तआला से की दुआ है कि मुआशरे की इस वक़्त की सबसे बड़ी खराबी को दूर फरमा दे और जिन मियां बीवी में न इत्तेफाक़ी हो उसे इत्तेफ़ाक़ और मुहब्बत में बदल दे-आमीन आमीन आमीन या रब्बुल आलमीन बिजाहिस सय्यदिल मुरसलीन सल्ललाहो तआला अलैहि वसल्लम*

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किताबे: बरकाते शरीअत, बरकाते सुन्नते रसूल, माहे रामज़ान कैसें गुज़ारे, अन्य किताब लेखक: मौलाना शाकिर अली नूरी अमीर SDI हिन्दी टाइपिंग: युसूफ नूरी(पालेज गुजरात) & ऑनलाईन पोस्टिंग: मोहसिन नूरी मन्सुरी (सटाणा महाराष्ट्र) अल्लाह عَزَّ وَجَلَّ हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल करने की तौफ़ीक़ अता करे आमीन. http://sditeam.blogspot.in